ग्रंथ कुटीर राष्ट्रपति भवन में स्थित शास्त्रीय भाषाओं का पुस्तकालय है। “ग्रंथ कुटीर” शब्द का अर्थ है - पुस्तकों और ज्ञान का घर। ग्रंथ कुटीर अध्ययन, विद्या और बौद्धिक विरासत के प्रति भारत के गहन सम्मान का प्रतीक है।

भारत की शास्त्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य के साथ भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में ग्रन्थ कुटीर का उद्घाटन दिनांक 23 जनवरी, 2026 को किया था।

ग्रंथ कुटीर भारत में सभी शास्त्रीय भाषाओं—असमिया, बंगाली, संस्कृत, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पालि, प्राकृत, ओड़िया, तमिल और तेलुगु—का प्रतिनिधित्व है, जिनमें से प्रत्येक एक सहस्राब्दी से अधिक समय से चली आ रही निरंतर साहित्यिक परंपरा की वाहक है।

ग्रंथ कुटीर में उक्त सभी शास्त्रीय भाषाओं में 2,300 से अधिक पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। इन ग्रंथों में महाकाव्य, दर्शन, साहित्य, विज्ञान, धर्म, भक्ति साहित्य आदि विषय सम्मिलित हैं। देश के विभिन्न भागों से महत्वपूर्ण पाठ्य सामग्रियों को एकत्र कर संग्रह को समृद्ध किया गया है। समग्र रूप से ये कृतियाँ भारत की प्राचीन और अविच्छिन्न साहित्यिक परंपराओं का सजीव चित्रण करती है, और एक हजार वर्षों से भी अधिक समय में संरक्षित एवं समृद्ध हुई सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करती हैं।

ग्रंथ कुटीर में 50 पांडुलिपियों का एक मूल्यवान संग्रह भी है, जिनमें से अनेक कागज, पेड़ों की छाल और ताड़पत्र पर हस्तलिखित हैं। इनका ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सौंदर्यात्मक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। ये पांडुलिपियाँ भारत की बहुभाषी और बहुविषयक पांडुलिपि परंपरा को प्रदर्शित करती हैं और देश की ज्ञान परंपराओं की सजीव साक्षी हैं। इस पांडुलिपि संग्रह का सृजन राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग से संभव हुआ है, जिसमें राज्य सरकारों, प्रतिष्ठित संस्थानों, विश्वविद्यालयों, शोध केंद्रों तथा व्यक्तिगत दाताओं का योगदान सम्मिलित है।





इसके अतिरिक्त ग्रंथ कुटीर में शास्त्रीय भाषाओं में भारत के संविधान का एक विशेष संग्रह भी उपलब्ध है, जो भारत के संवैधानिक मूल्यों और उसकी सभ्यतागत तथा भाषाई विरासत के सामंजस्य का प्रतीक है।

ग्रन्थ कुटीर के उद्घाटन समारोह की कुछ अन्य छायाचित्र





